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Navratri | नवरात्रि में महागौरी की पूजा से दूर करें वैवाहिक बाधाएं

Navratri | नवरात्रि में महागौरी की पूजा से दूर करें वैवाहिक बाधाएंNavratri | नवरात्रि में महागौरी की पूजा से दूर करें वैवाहिक बाधाएं . नवरात्री में नौ दिनों में माता के विभिन्न स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है तथा अपनी विशेष मनोकामनाओं को पूरा करने के लिए देवी माँ के विशेष स्वरूप की पूजा करने का भी विधान है। नवरात्री के आठवें दिन शंख और चन्द्र के समान श्वेतवर्ण धारी महागौरी स्वरूप की उपासना करने से विवाह ( Marriage)  में आने वाली बाधाएं शीघ्र ही समाप्त हो जाती है तथा मनोनुकूल वर की प्राप्ति होती है।
माता दुर्गा का अष्टम स्वरुप भगवान शिवजी की अर्धांगिनी रूप में हैं। माता गौरी / पार्वती कठोर तपस्या के बाद शिवजी को अपने पति के रुप में प्राप्त किया की थी अतः इस दिन यदि कोई भी कन्या पूरी श्रद्धा तथा निष्ठा के साथ महागौरी की उपासना करती

कहा जाता है की देवी के महागौरी स्वरूप की उपासना से भक्तों के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं तथा भक्त अपने जीवन पथ में सुखद अनुभूति को प्राप्त करता है। माता दुर्गा की अष्टम शक्ति “महागौरी” जिसकी पूजा-अर्चना से उसके भक्तों में सात्विक गुणों का संचार उत्पन्न होता है साथ ही वह जीवन में आने वाली तामसिक विचारो पर विजय प्राप्त करता है।

सौभाग्यादि च यत्किंचित दृश्यते ललनाजने।

तत्सर्वं तत्प्रसादेन तेन जाप्यमिदं शुभम। ।

अर्थात स्त्रियों में कुछ भी सौभाग्य आदि दृष्टिगोचर होता वह सब देवी के प्रसाद का ही फल है। कहा गया है —

ऐश्वर्यं यत्प्रसादेन सौभाग्यारोग्यसम्पदः।

शत्रुहानिः परो मोक्षः स्तूयते सा न की जनैः।

अर्थात विशेषतः नवरात्र में माता के सभी स्वरूपों की पूजा अर्चना करने से भक्त को ऐश्वर्य, सौभाग्य, आरोग्य, सम्पत्ति, शत्रुनाश तथा परम मोक्ष की सिद्धि होती है।

अष्टम शक्ति मां दुर्गा का महागौरी रूप है इस रूप की उपासना से भक्तजन के अन्तःकरण में स्थित अज्ञानता तथा तामसिक विचार सात्विक विचार में परिवर्तन हो जाता है तथा जातक के जीवन में सात्विक ऊर्जा का संचार होने लगता है जिससे उनके अंतकरण में श्रद्धा, विश्वास व निष्ठा की भावना दृढ हो जाती है तथा व्यक्ति का जीवन सहज,सुबोध और सुगम्य बन जाता है।

कहा जाता है कि सीता माता ने भी श्रीराम की प्राप्ति के लिए महागौरी स्वरूप की उपासना की थी। इसी कारण आज भी भक्तजन जब पूरी श्रद्धा और निष्ठां के साथ माता महागौरी की पूजा अर्चना करने से शादी-विवाह के कार्यों में आ रही बाध्ये शीघ्र ही समाप्त हो जाती है तथा कन्या सुयोग्य वर को प्राप्त करती है।

माता महागौरी का मंत्र

श्वेते वृषे समारुढा श्वेताम्बरधरा शुचिः।
महागौरी शुभं दघान्महादेवप्रमोददा।।

जाने ! कैसे मिला माता को महागौरी रूप

माता पार्वती भगवान शिव की प्राप्ति के लिए कठोर पूजा की थी, जिससे माता का शरीर काला पड़ गया था। जब महादेव माता की तपस्या से प्रसन्न होकर देवी को स्वीकार किया तथा जैसे ही गंगा जल की धार देवी पर पड़ी माता कांतिमान गौर ( श्वेत /White ) वर्ण की हो गईं इसी कारण माता का एक नाम महागौरी हो गया।

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