Rudraksh

5 मुखी रुद्राक्ष पहनने के नियम

5 मुखी रुद्राक्ष पहनने के नियम . 5 मुखी रुद्राक्ष में 5 मुख होता है इसीलिए इसे पच मुखी रुद्राक्ष कहा जाता है। इसके 5 मुख में महादेव यथा – सद्योजात, ईशान, तत्पुरुष, अघोर, वामदेव के रूप में निवास करते है। पंचमुखी रुद्राक्ष में पञ्च देवों के निवास होने के कारण इसको शिव का आत्म-स्वरूप […]

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रुद्राक्ष एक लाभ अनेक | Rudraksh Pahanane ke Fayade

रुद्राक्ष एक लाभ अनेक | Rudraksh Pahanane ke Fayade भगवान शिव वा महादेव को खुश करने का सबसे आसान उपाय है रुद्राक्ष धारण करना। रुद्राक्ष धारण करने से शिवजी इंसान की हर इच्छाये शीघ्र ही पूरा करते है। कहा जाता है कि भगवान् महादेव जब  तपस्या के बाद जब अपनी आँखे खोली तब उनकी आंखों

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Eight Mukhi Rudraksha | 8 मुखी रुद्राक्ष – Astroyantra

    Eight Mukhi Rudraksha | 8 मुखी रुद्राक्ष – Astroyantra अष्ट मुखी रुद्राक्ष को मन्त्र  महार्णव ग्रन्थ में गणेश (विनायक) और कार्तिकेय (महासेन) कहा गया है। यह  रुद्राक्ष    8 माताओ का का भी स्वरूप माना जाता है। यह रुद्राक्ष अष्टवसुओं को भी प्रिय है। इस रुद्राक्ष में गंगा का भी निवास है। इस

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Saat Mukhi Rudraksha | सप्तमुखी रुद्राक्ष – Astroyantra

  Saat Mukhi Rudraksha | सप्तमुखी रुद्राक्ष – Astroyantra सप्तमुखी रुद्राक्ष अर्थात जिस रुद्राक्ष में सात मुख हो उसे सप्तमुखी रुद्राक्ष कहते है। इस रुद्राक्ष के देवता सात माताए है। सप्तर्षि  और सूर्य भी इसके देवता माने जाते है। सप्तमुखी रुद्राक्ष को महासेन ( कार्तिकेय) अनंत और नागराज भी कहा जाता है। यह रुद्राक्ष अत्यंत

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बारहमुखी रुद्राक्ष मंत्रिपद दिलाता है | Twelve Mukhi Rudraksh

बारहमुखी रुद्राक्ष मंत्रिपद दिलाता है | Twelve Mukhi Rudraksh बारहमुखी रुद्राक्ष मंत्रिपद दिलाता है क्योंकि यह साक्षात सूर्य स्वरूप ही है। इसके धारण करने से धन-धान्य,  मान-सम्मान की वृद्धि होती है। इससे सूर्य देव प्रसन्न होते है और अश्वमेघ यज्ञो का फल मिलता है। सूर्य को कुंडली में आत्मा, पिता, सरकार ऊर्जा इत्यादि का कारक

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षड मुखी रुद्राक्ष(Six Mukhi Rudraksh)धन प्रदान करता है

षड मुखी रुद्राक्ष(Six Mukhi Rudraksh) धन प्रदान करता है यह साक्षात् कार्तिकेय तथा गणेश का स्वरूप है इसके धारण करने से विद्या, बुद्धि तथा धन की वृद्धि होती है साथ ही भ्रूण हत्या (Feticide)  जैसे पापो से मुक्ति मिलती है। श्रीमद्भागवत पुराण में में इसे कार्तिकेय तथा रुद्राक्षवालोपनिषद् में कार्तिकेय के साथ गणेश कहा गया

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पंचमुखी रुद्राक्ष धारण करने से संतान एवं धन सुख प्राप्त होता है

पंचमुखी रुद्राक्ष सर्वगुणों से संपन्न है इसके धारण करने से संतान एवं धन सुख प्राप्त होता है। वस्तुतः यह रुद्राक्ष सभी रुद्राक्षों में सर्वाधिक शुभ तथा पुण्य प्रदान करनेवाला माना गया है। महादेव शिव के पांच देव रूप है यथा – सद्योजात ईशान तत्पुरुष अघोर वामदेव कहा जाता है कि ये पांचो देवरूप पंचमुखी रुद्राक्ष

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चतुर्मुखी रुद्राक्ष विद्यार्थियों के लिए एक उपहार है

चतुर्मुखी रुद्राक्ष (Chaturmukhi Rudraksh) विद्यार्थियों के लिए एक उपहार है इसके धारण से शीघ्र ही विद्या का लाभ मिलता है इसका मुख्य कारण है कि इस रुद्राक्ष का संचालक तथा नियंत्रण ग्रह बुध है तथा ज्योतिष विद्या में बुध ग्रह बुद्धि को नियंत्रण तथा सञ्चालन करता है फलस्वरूप सुबुद्धि का विकास होता है। विशेषतः वैसे विद्यार्थियों

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त्रिमुखी रुद्राक्ष मांगलिक दोष दूर करता है

जन्मकुंडली(Horoscope) में यदि मंगल ग्रह(Mars planet) प्रतिकूल स्थिति में है तथा विवाहादि प्रसंग में मांगलिक  दोष उत्पन्न कर रहा है तो त्रिमुखी रुद्राक्ष (trimukhi rudraksh) मांगलिक दोष दूर करता है। मंगल ग्रह गर्भपात अथवा भ्रूण हत्या का भी कारक ग्रह है। अतएव मंगल ग्रह की प्रतिकूलता से उत्पन्न सभी रोगो और दोषो के निदान और निवारण के

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द्विमुखी रुद्राक्ष स्त्रियों के लिए वरदान स्वरूप है।

द्विमुखी रुद्राक्ष हरगौरी-स्वरूप(अर्धनारीश्वर) है  इसे धारण करने से भगवान शिव अत्यंत ही प्रसन्न होते है। द्विमुखी रुद्राक्ष में दो धार होते हैं। इसके दो धार आदि-अन्त, जन्म-मृत्यु, शिव-गौरी के रूप में विद्यमान है। वस्तुतः यह दो धार द्वैताद्वैत, परमात्मा और आत्मा ब्रह्म और जीव का,ईश्वर और माया का, पुरुष और स्त्री के एकत्व का प्रतीक

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