Chaitra Navratri Tithi 2027 : जानें ! कब करें कलश स्थापन, अष्टमी, नवमी, और कन्या पूजन?
Chaitra Navratri Tithi 2027 : जानें ! कब करें कलश स्थापन, अष्टमी, नवमी, और कन्या पूजन? आद्यशक्ति स्वरूपा माता दुर्गा की उपासना का पवित्र त्यौहार चैत्र नवरात्रि का प्रारम्भ इस वर्ष 7 अप्रैल (बुधवार) 2027 से शुरू होकर 15 अप्रैल (गुरुवार) तक चलेगी।
1. प्रतिपदा तिथि का समय (Tithi Timing)
हिंदू पंचांग के अनुसार, वर्ष 2027 में चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि (चैत्र नवरात्रि का पहला दिन) 7 अप्रैल 2027 को सुबह 05:21 बजे से शुरू हो जाएगी।
चूंकि यह तिथि 7 अप्रैल को सूर्योदय के समय मौजूद रहेगी, इसलिए उदया तिथि के सिद्धांत के अनुसार इसी दिन से चैत्र नवरात्रि का विधिवत आरंभ माना जाएगा और कलश स्थापना भी इसी सुबह की जाएगी।
2. उदया तिथि का सिद्धांत (Udaya Tithi Principle)
उदया तिथि क्या है? हिंदू धर्म में जिस तिथि में सूर्योदय (सूर्यास्त के समय जो तिथि मौजूद हो या सुबह सूर्य उगते समय जो तिथि हो) होता है, वह तिथि पूरे दिन के धार्मिक कार्यों के लिए मान्य मानी जाती है।
7 अप्रैल 2027 को सुबह जब सूर्योदय होगा, तब पंचांग के अनुसार प्रतिपदा तिथि (चैत्र शुक्ल प्रतिपदा) लागू रहेगी।
7 अप्रैल को तिथि शुरू होने के दिन ही , कलश स्थापना और मां शैलपुत्री की पूजा सूर्योदय के बाद के शुभ मुहूर्त में की जाएगी।
नवरात्रि के प्रथम दिन, अष्टमी और नवमी का विशेष महत्त्व है। वैसे नवरात्रि के सभी 9 दिन विशेष रूप से शुभ होते हैं। चैत्र शुक्ल अष्टमी को दुर्गा अष्टमी और नवमी तिथि को महानवमी के नाम से भी जानते हैं।
Chaitra Navratri: जानें ! कब है चैत्र नवरात्रि की अष्टमी और नवमी तिथि ?
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दुर्गा अष्टमी (महाअष्टमी): वर्ष 2027 में महाअष्टमी का पावन पर्व 14 अप्रैल 2027 (बुधवार) को मनाया जाएगा। इस दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है और कई घरों में कन्या पूजन (कंचक पूजन) भी इसी दिन होता है।
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राम नवमी (महानवमी): नवमी तिथि 15 अप्रैल 2027 (गुरुवार) को रहेगी। शास्त्रों के अनुसार, भगवान श्री राम का जन्म चैत्र नवमी के दिन मध्याह्न काल (दोपहर के समय) में हुआ था, इसलिए 15 अप्रैल को दोपहर के समय नवमी तिथि मौजूद रहने के कारण इसी दिन धूमधाम से राम नवमी और नवरात्रि पारण मनाया जाएगा। जो लोग नवमी को कन्या पूजन करते हैं, वे 15 अप्रैल को सुबह पूजन कर सकते हैं।
कन्या पूजन तिथि और शुभ मुहूर्त 2027
नवरात्रि में कन्या पूजन से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं और भक्तों को सुख समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं। इसलिए नवरात्रि में कन्या पूजन जरूर ही करना चाहिए। कन्या पूजन दुर्गा अष्टमी और महानवमी के दिन की जाती है । कुछ लोग दुर्गाष्टमी के दिन ही कन्या पूजन करते हैं, तो कुछ लोग नवमी के दिन भी मेरा आप से निवेदन है की पहले से आप जिस तिथि में कन्या पूजन करते आ रहे हैं उसी तिथि में कन्या पूजन करें ।
अष्टमी और नवमी तिथि को कन्या पूजन की जाएगी। कन्या को मां दुर्गा का स्वरूप माना जाता है, इसलिए नवरात्रि में उनका पूजन करके आशीर्वाद लिया जाता है। कन्या पूजन से घर में सुख-समृद्धि की वृद्धि होती है। इसी कारण इन दो तिथियों में कन्या पूजन करने का विधान है। विशेष जानने के लिए निम्न url पर क्लिक करें …… नवरात्रि में माँ दुर्गा के नौ रूपों की पूजा कैसे करें
Chaitra Navratri : नवरात्रि में पंचक का प्रभाव?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, वर्ष 2027 में चैत्र नवरात्रि की शुरुआत पंचक काल में नहीं हो रही है।
पंचक काल तब शुरू होता है जब चंद्रमा कुंभ या मीन राशि में गोचर करते हैं। वर्ष 2027 में चैत्र नवरात्रि 7 अप्रैल से प्रारंभ हो रही है, और इस दौरान कोई पंचक दोष नहीं लग रहा है। इसलिए आपको नवरात्रि की पूजा में पंचक के किसी भी प्रभाव या अशुभता को लेकर परेशान होने की आवश्यकता नहीं है।
वैसे भी शास्त्रों के अनुसार, आद्यशक्ति मां दुर्गा की पूजा अपने आप में समस्त अशुभ प्रभावों और दोषों को दूर करने वाली मानी गई है। आप बिना किसी संशय के 7 अप्रैल 2027 को शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना कर अपनी पूजा शुरू कर सकते हैं।
Chaitra Navratri : घट स्थापना हेतु मुहूर्त
चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 7 अप्रैल 2027 की सुबह 05:21 बजे से शुरू हो जाएगी।
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घटस्थापना का शुभ मुहूर्त: 7 अप्रैल 2027 को सुबह 06:18 बजे से सुबह 07:22 बजे तक रहेगा।
नवरात्री में कैसे करें कलश/घट स्थापना
चैत्र नवरात्रि 2027 कैलेंडर तालिका
| नवरात्रि तिथि | दिनांक (2027) | दिन (वार) | माता का स्वरूप |
| प्रतिपदा | 7 अप्रैल | बुधवार | शैलपुत्री (कलश स्थापना) |
| द्वितीया | 8 अप्रैल | गुरुवार | ब्रह्मचारिणी |
| तृतीया | 9 अप्रैल | शुक्रवार | चंद्रघंटा |
| चतुर्थी | 10 अप्रैल | शनिवार | कूष्मांडा |
| पंचमी | 11 अप्रैल | रविवार | स्कंदमाता |
| षष्ठी | 12 अप्रैल | सोमवार | कात्यायनी |
| सप्तमी | 13 अप्रैल | मंगलवार | कालरात्रि |
| अष्टमी | 14 अप्रैल | बुधवार | महागौरी (दुर्गा अष्टमी) |
| नवमी | 15 अप्रैल | गुरुवार | सिद्धिदात्री (राम नवमी) |

