Second Lord in Different Houses Result in Hindi

Second Lord in different houses Result in Hindi | द्वितीयेश का विभिन्न भाव में फल | किसी भी जातक के जन्मकुंडली में दूसरा स्थान धन,वाणी परिवार नेत्र मुख जिह्वा इत्यादि होता है इस भाव का स्वामी जब अन्य स्थान पर जाकर बैठता है तो उस स्थान को प्रभावित करता है और उस स्थान विशेष के लिए निर्धारित विषय-वस्तु को संज्ञान में लेकर जातक जो भी अच्छे बुरे फल प्रदान करता है उसकी चर्चा मैं प्रस्तुत लेख में करने जा रहा हू।

Second Lord in First House । दूसरे भाव के स्वामी का प्रथम भाव में फल

यदि दूसरे भाव का स्वामी प्रथम भाव में स्थित है तो वैसा जातक स्वयं के मेहनत से धन कमाता है। आपके पास धन की कमी नहीं होगी आप धन धान्य से परिपूर्ण होंगे। आपको संतान सुख मिलेगा। साझेदारी में व्यापार से लाभान्वित होंगे। पारिवारिक जीवन में कुछ समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। आप चालाक और लालची हो सकते हैं। दूसरे का काम करके सुख महसूस करेंगे।

Second Lord in Second House | दूसरे भाव के स्वामी का दूसरे भाव में फल

जिस जातक के जन्मकुंडली में दूसरे भाव का स्वामी दूसरे भाव में ही स्थित है तो वह धनवान होता है ।आपकी वाणी में ओज होगा लोग आप की वाणी से प्रभावित होंगे । आपको पत्नी का साथ मिलते रहेगा। आप दो पत्नी का सुख भी भोग सकते है। धन की कमी नहीं महशुस करेंगे। आपके पिताजी सरकारी नौकरी में हो सकते है। आप यात्रा में धन व्यय करेंगे। esa jaatak अपने मेहनत के बल पर

Second Lord in Third House | दूसरे भाव के स्वामी का प्रथम भाव में फल

यदि दुसरे भाव का स्वामी तीसरे भाव में हो तो वैसा जातक चतुर तथा लालची होता है । ऐसा व्यक्ति कंजूस भी होता है । ऐसा व्यक्ति शास्त्र विरुद्ध भी कार्य करता है परन्तु तब जब अशुभ ग्रहों के साथ सम्बन्ध हो। ऐसा व्यक्ति अपने परिश्रम और भाइयो के सहयोग से धनार्जन तथा भाग्य का निर्माण करता है । आप को अपने भैयोसे अच्छे सम्बन्ध बनाकर रखना चाहिए ऐसा करने से आप उन्नति की पराकाष्ठा को प्राप्त कर सकते है।

Second Lord in Different Houses Result in Hindi

Second Lord in Fourth House | दूसरे भाव के स्वामी का चतुर्थ भाव में फल

यदि धन भाव का स्वामी चतुर्थ भाव में हो तो जातक अचूक सम्पति का मालिक होता है ।ऐसा जातक अपने हाथों से घर बनाता है। यदि दुसरे भाव का स्वामी नेचुरल शुभ ग्रह हो ओने कुटुंब से अच्छा सम्बन्ध बना रहता ।आपके पिताजी कोई क्रोनिक बीमारी से ग्रसित हो सकते है । यदि धन भाव का स्वामी जो शुभ ग्रह अथवा उच्च होकर चतुर्थ स्थान में बृहस्पति ग्रह के साथ स्थित है तो वैसा जातक राजा की तरह इस मर्त्यलोक में निवास करता है ।

Second Lord in Fifth House | दूसरे भाव के स्वामी का पंचम भाव में फल

ऐसा जातक धन के मामलों में भाग्यशाली होता है । संतान पक्ष से कभी-कभी दुखी होना पड़ता है परन्तु संतान के जन्म के बाद धन धान्य की वृद्धि होती है। जन्म कुंडली में जब इस भाव की दशा चल रही हो तो जातक को अपने कार्यो से लाभ मिलता है। ऐसा जातक धन के मामलो में बहुत ही चालाक होता है। धन का अर्जन प्रायः अपने बुद्धि के बल पर करता है कहा जाता है की ऐसा जातक अपनी वाणी का खाता है।

Second Lord in Sixth House | दूसरे भाव के स्वामी का षष्ठ भाव में फल

दुसरा भाव धन भाव है तो छठा भाव रोग दुःख और शत्रु का है अतः द्वितीय भाव का स्वामी यदि षष्ठ भाव में स्थित है तो वैसा जातक शत्रु से धन कमाता है परन्तु धनार्जन तब होगा जब ग्रह शुभ अवस्था में स्थित हो। अशुभ स्थिति में धन लाभ की सम्भावना कम हो जाती है बल्कि शत्रु के कारण धन का नुकसान होते देखा गया है ।
यदि शुभ अवस्था में ग्रह है तो आप इंटरेस्ट से धन कमायेंगे अर्थात आप ब्याज पर पैसे का लेन देन से धनोपार्जन कर सकते है । यदि ग्रह कमजोर है तो इंटरेस्ट का काम नहीं करना चाहिए । आप को आँख कान नाक गला तथा दांत की बीमारी हो सकती है।

Second Lord in Seventh House | दूसरे भाव के स्वामी का सप्तम भाव में फल

यदि द्वितीय भाव का स्वामी सप्तम स्थान में बैठा है तो वैसा जातक धन होते हुए भी धन की कमी महशुस करता है । ऐसा व्यक्ति परस्त्रीगामी होता है । दुसरे स्त्री के ऊपर अपना धन खर्च करता है । साझेदारी में व्यवसाय करता है परन्तु कई बार व्यवसाय में नुकसान भी उठाना पड़ता है ।पत्नी के साथ आपके रिश्ते में हमेशा टकराव बना रह सकता है । यदि अशुभ ग्रह की दृष्टि या संयोग है तो आप की पत्नी या पति का चरित्र संदेह के घेरे में होता है ।

Second House Lord in Eighth House | दूसरे भाव के स्वामी का अष्टम भाव में फल

ऐसा जातक भूमि का मालिक होता है। आपके पास गुप्त धन अवश्य ही होगा आप जितना कमाएंगे उसमे से कुछ पैसे वैसे जगह रखेंगे जिसकी जानकारी आपके अलावा कोई नहीं जानेगा । आपको धन की कमी महशुस नहीं होगी। यदि इस भाव में अशुभ ग्रह है तो दाम्पत्य जीवन में कोई न कोई परेशानी हो सकती है । मीन लग्न में यदि दुसरे भाव का स्वामी अष्टम स्थान में बैठे है तो मांगल्य दोष से प्रभावित होंगे । इसके कारण जीवन साथी के साथ रिश्तो में अकारण टकराव होते रहेगा ।

Second House Lord in Ninth House | दूसरे भाव के स्वामी का नवम भाव में फल

द्वितीय भाव अर्थात धन स्थान के स्वामी का नवम वा भाग्य स्थान में बैठना शुभ माना गया है । आपको अपने पिता के सम्पत्ति का सुख मिलेगा अर्थात आपके पिता के पास धन होगा जिसका सुख आप भोगेंगे । आपके पिता कोई न कोई बीमारी से ग्रसित रहेंगे । आप जैसे लोग हमेशा अपने भविष्य के प्रति चिंतित रहेंगे । आप बड़े ही प्रभावशाली और अपने कार्यो में कुशल होंगे । बचपन में आप बीमारी से परेशान रह सकते है परन्तु धीरे धीरे सब ठीक हो जाएगा।
आप किसी न किसी धार्मिक कार्य से जुड़ें रहेंगे तथा धार्मिक यात्रा करने के शौक़ीन भी होंगे ।

Second Lord in Different Houses Result in Hindi

Second Lord in Tenth House | दूसरे भाव के स्वामी का दशम भाव में फल

द्वितीय भाव अर्थात धन स्थान के स्वामी का दशम वा कर्म स्थान में बैठना बहुत ही अच्छा माना जाता है । ऐसा व्यक्ति अपने कर्मो के बल पर देश विदेश में मान सम्मान पाता है । आप अत्यंत ही प्रतिभावान होंगे। पठन पाठन से हमेशा ही आपका रिश्ता बना रहेगा। यदि पहले से ही आपका कोई पारिवारिक व्यवसाय चल रहा है तो आप भी व्यवसाय के हिस्सा बन सकते है। हो सकता है की विरासत में ही आपको कोई बना बनाया व्यवसाय मिल सके।
धन के मामलो में आप बहुत ही भाग्यशाली होंगे aur आपके पास प्रचुर मात्रा में धन होगी। परन्तु इस बात को भी न भूले मेहनत तथा इमानदारी से कमाया गया धन ही अंततः रुक पायेगा। यदि आप गलत तरीके से पैसा कमाया है तो निश्चित ही नुकसान होगा।
जिस जातक के कुंडली में धन का स्वामी कर्म स्थान में होता है तो वह स्वयं के हाथो से रहने के लिए भवन का निर्माण करता है।आपके पिताजी सरकारी नौकरी में कार्य कर सकते है। आप समाज और घर परिवार में सम्मानीय व्यक्ति के रूप ने प्रतिष्ठित होंगे।

Second Lord in Eleventh house | दूसरे भाव के स्वामी का एकादश भाव में फल

द्वितीय भाव अर्थात धन स्थान के स्वामी का एकादश वा लाभ स्थान में होता है तो वैसा व्यक्ति धनवान होता है। यदि दुसरे भाव का स्वामी लाभ भाव के स्वामी के साथ बैठा है तब तो क्या कहना सोने पे सुहागा वाली कहावत आपके जीवन में चरितार्थ होगी। जीवन काल में दुसरे भाव के स्वामी की दशा मिलती है तो उस समय अचूक लाभ होता है। आपको समाज में मान सम्मान मिलेगा लोग आपको आपके नाम से जानेगे। आप एक अच्छे व्यवसायी बन सकते है।

Lord of second House in Twelfth House | दुसरे भाव का स्वामी बारहवे भाव में फल

दुसरे भाव का स्वामी यदि बारहवे भाव में स्थित हो तो वैसा जातक बहुत ही खर्चीला होता है और यदि संयोग से शनि दुसरे भाव का स्वामी होकर बारहवे भाव में है तो वैसे जातक के पास पैसा टिक ही नहीं सकता । वैसा जातक अपने धन को इन्वेस्ट उचित जगह इन्वेस्ट करे तो अपार धन की वृद्धि होती है ।
ऐसा व्यक्ति हमेशा दुसरो के धन को देखकर परेशान रहता है और उसकी चाहत होती है की काश मुझे यह धन मिल जाता । ऐसा जातक अपने एक संतान से अवश्य ही दुखी होता है । पुराने जमीन जायदाद को लेकर कोई न कोई विवाद हो सकता है । आपको नेत्र दोष हो सकता है । आप कर्ज लेकर कोई भी करना पसंद करते है ।

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