Effects of Fourth House Lord in Fourth House in Hindi

Effects of fourth house lord in fourth house in hindiEffects of fourth house lord in sixth house in hindi | चतुर्थेश चतुर्थ भाव में फल | किसी भी जन्मकुंडली में चतुर्थ भाव वाहन, माता, प्रॉपर्टी, मन, भूमि, ख़ुशी, बंधू, शिक्षा इत्यादि का कारक भाव है इस भाव से कथित विषय वस्तु के सम्बन्ध में जानकारी मिलती है। यदि चौथे भाव का स्वामी चतुर्थ भाव में ही हो तो ऐसा व्यक्ति बंधू-बांधव से परिपूर्ण होता है । आपके पास दोस्तों की कमी नहीं होगी आप बहुत जल्द ही किसी को अपना मित्र बना लेते है । आप अपने जीवन में धन दौलत, नौकर, भूमि, वाहन, शिक्षा, शांति, धैर्य और माता का सुख प्राप्त करेंगे । आप अचूक सम्पत्ति के मालिक़ हो सकते है । आपके पास अपनी गाड़ी होगी । यदि चतुर्थेश उच्च का या स्व क्षेत्री है तो आपके पास बड़ी गाडी होगी ।

भारतीय ज्योतिष की पुस्तक गर्ग संहिता में में कहा गया है —

सुखपतौ सुखगे सुखसन्निधौ नृपसमो धनवान बहुसेवक ।
पितृसुखं बहुलं जनमान्यता रथजगजाश्च शभै सुखभग् नरः ।।

अर्थात यदि सुख भाव ( Fourth House ) सुख भाव में ही है तो वैसा व्यक्ति सुखी जीवन व्यतीत करता है। वह अपना जीवन राजा के समान जीता है ( राजयोग )। राजा और राजा के समान के अंतर को समझने में समझदारी होगी। आप धनवान होंगे तथा आपके घर में अनेक नौकर होगा। पिता का सुख मिलेगा। समाज तथा परिवार में आपकी प्रतिष्ठा होगी।

ऐसा जातक अपने माता के साथ ज्यादा आत्मीय होता है । आप प्रसन्न और स्थिर चित वाले होते है। आपका स्वभाव शांत सौम्य और सात्विक विचारो से युक्त होगा यही कारण है की आपमें धार्मिकता का भाव कूट कूट कर भरा होता है

आप अपने जीवन में हमेशा सत्य और न्याय के पथ पर चलने का प्रयास करते है ।न्याय का साथ देना अपना सौभाग्य समझते है परन्तु यह तब जब चतुर्थ भाव और भावेश पर किसी भी अशुभ भाव भावेश तथा ग्रहों की दृष्टि या युति न हो यदि ऐसा होगा तो ऊपर से कुछ और अंदर से कुछ और होंगे अर्थात मुख में राम बगल में छुरी वाली कहावत आपके ऊपर चरितार्थ होगी।

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