Baglamukhi Beej Mantra Benefits | बगलामुखी जयंती 2022 | मंत्र यन्त्र साधना

Baglamukhi Beej Mantra Benefits | बगलामुखी जयंती 2022 | मंत्र यन्त्र साधना . दिनांक 09 मई 2022 को रात्रिव्यापिनी नवमी को शक्तिरूपा बगलामुखी देवी की पूजार्चन करने से ऋण,रोग व शत्रु का भय समाप्त हो जाता है। वैदिक तंत्र-मन्त्र-यंत्र के ग्रन्थ में कहा गया है की यदि शत्रुओ का शमन करना है तो श्री बगलामुखी (Baglamukhi)  मन्त्र का प्रयोग करना करना चाहिए।  इस मन्त्र में शत्रुओं को शमन करने की पूरी शक्ति होती है।  यह पीताम्बरा विद्या के नाम से भी विख्यात है।  बगलामुखी मन्त्र यंत की की साधना (Baglamukhi Sadhna) प्रायः शत्रु भय से मुक्ति और वाक् सिद्धि के लिए करने का विधान  है।

Baglamukhi 2022 में जयंती कब मनाई जाएगी ?

हिंदू पंचांग 2022 के अनुसार, बगलामुखी जयंती वैशाख मास में शुक्ल पक्ष के 8 वें दिन (अष्टमी तिथि) को मनाया जाता है। ग्रेगोरियन कैलेंडर 2022 के अनुसार, यह दिन मई या अप्रैल के महीने में ही आता है। वर्ष 2022 में यह तिथि 9 मई को आता है इस कारण बगलामुखी जयंती 9 मई 2022 को मनाई जाएगी।

यदि जीवन यात्रा में आप निम्नलिखित विषयों —

  1. शत्रु बाधा,
  2. कलह,
  3. तिरस्कार,
  4. भय।
  5. वाणी दोष
  6. अपमान
  7. भूत-प्रेतादि
  8. केश-मुक़दमा

इत्यादि को लेकर परेशान है  इसे दूर करने का, एक मात्र उपाय है –  किसी गुरु के सानिध्य में जाकर “बगलामुखी मंत्र और यन्त्र की सिद्धि’ करना।  इस यन्त्र मन्त्र की सहायता से आप अपनी परेशानी को दूर कर सकते है।  बगुलामुखी का सम्बन्ध दुर्गा माता है से और दुर्गा माता सभी दुखो को नष्ट करने वाली होती  है।  देवी माता शत्रुओं की वाणी एवं बुद्धि को ही कुंठित कर देती है, जिससे शत्रु आपके प्रति षड्यंत्र नहीं कर पाते हैं ।

बगलामुखी देवी की साधना-आराधना से मनुष्य जीवन की सभी प्रकार की बाधाओं और समस्याओं को समाप्त कर आनन्द एवं प्रसन्नतापूर्वक जीवन यापन करने लगता है।  बगलामुखी यंत्र शत्रुओं की हर षड्यंत्र को समाप्त कर देती है। इसकी साधना शत्रुओं पर पूर्ण विजय दिलाने में समर्थ है। इस मंत्र यंत्र की पूजा अर्चना मात्र से साधक के सारे संकट समाप्त हो जाते हैं, शत्रु परास्त होते हैं और घर तथ मन मस्तिष्क में रिद्धि- सिद्धि की वृद्धि होने लगती है। बगलामुखी मन्त्र यन्त्र की पूजा अर्चना या साधना कोई भी व्यक्ति कर सकता है, परन्तु  इस  तंत्र की उपासना किसी योग्य साधक के सान्निध्य में ही करनी चाहिए।

कैसे करें ?  बगुलामुखी मंत्र व यन्त्र की साधना और सिद्धि

बगलामुखी मंत्र  की साधना के लिए सर्वप्रथम माता बगलामुखी की प्रतिमा, यंत्र , हल्दी की माला, पीले वस्त्र, पीला आसन और चौकी पर बिछाने के लिए पीला कपड़ा लेना चाहिए।  माता बगलामुखी की साधना में पीले वस्त्रों का प्रयोग करना जरुरी होता है |

Baglamukhi – साधना में मन्त्र की संख्या

माँ बगलामुखी का बीज मंत्र 36 अक्षरों से मिलकर बना है | माँ बगलामुखी को 36 का अंक बहुत प्रिय है इसीलिए साधना में मंत्र जप 3600 या 36000  की संख्या में ही करना चाहिए।  आपने जितना मन्त्र की संख्या का निर्धारित किया है उसे आप को 41 दिन में पूरा करना चाहिए मंत्रो की संख्या प्रतिदिन एक समान रखना चाहिए।

मन्त्र साधना का समय

माँ बगलामुखी की साधना रात्रि में की जानी चाहिए।  रात्रि 10 बजे के बाद कोई भी समय निश्चित कर प्रतिदिन उसी समय पर साधना करना चाहिए।

साधना के लिए स्थान तथा विधि

मन्त्र साधना के लिए अपने घर के दक्षिण दिशा में एक चौकी पर पीला वस्त्र बिछाकर माँ बगलामुखी की प्रतिमा और यंत्र को स्थापित करें | अब आप फोटो के सामने पीला आसन बिछाकर व पीले वस्त्र पहनकर बैठ जाये |

माँ बगलामुखी की प्रतिमा के सामने चौकी के नीचे सरसों के तेल का दीप जलाये।  उसके बाद हाथ में जल लेकर संकल्प ले और हल्दी की माला द्वारा मंत्र जप प्रारम्भ करें | मंत्र जप पूर्ण होने के बाद फिर से हाथ में जल लेकर संकल्प ले।  41 दिनों तक एक ही समय और एक ही स्थान पर मंत्र जप करना चाहिए। 41 दिन पूरे होने पर जितने मंत्र जप आपने इन दिनों में किये है उसके 10वें भाग से आहुति देकर हवन करें।

Baglamukhi | साधनाकाल में क्या नही करना चाहिए

  • पीत वस्त्र का धारण करें।
  • एक समय अथवा अल्पाहार भोजन करें।
  • ब्रह्मचर्य का पालन करें।
  • नाख़ून नहीं काटे।
  • बाल नहीं कटवाए।

माँ बगलामुखी मंत्र हेतु विनियोग –

ऊँ अस्य श्री बगलामुखी मंत्रस्य नारद ऋषिः त्रिष्टुप छंदः श्री बगलामुखी देवता ह्लीं बीजं स्वाहा शक्तिः प्रणवः कीलकं ममाभीष्ट सिद्धयार्थे जपे विनियोगः।

श्री बगलामुखी दैवतायै नमो ह्रदये।

ह्रीं बीजाय नमो गुह्ये। स्वाहा शक्तये नम: पाद्यो:।

ऊँ नम: सर्वांगं श्री बगलामुखी देवता प्रसाद सिद्धयर्थ न्यासे विनियोग:।

माँ बगलामुखी मंत्र हेतु आवाहन

ऊँ ऐं ह्रीं श्रीं बगलामुखी सर्वदृष्टानां मुखं स्तम्भिनि सकल मनोहारिणी अम्बिके इहागच्छ सन्निधि कुरू सर्वार्थ साधय साधय स्वाहा।

माँ बगलामुखी मंत्र हेतु ध्यान

सौवर्णामनसंस्थितां त्रिनयनां पीतांशुकोल्लसिनीम्हेमावांगरूचि शशांक मुकुटां सच्चम्पकस्रग्युताम्

हस्तैर्मुद़गर पाशवज्ररसना सम्बि भ्रति भूषणै  व्याप्तांगी बगलामुखी त्रिजगतां सस्तम्भिनौ चिन्तयेत्।

Baglamukhi | माँ बगलामुखी हेतु मंत्र

ॐ ह्रीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां  वाचं मुखं पदं स्तंभय जिह्ववां कीलय बुद्धि विनाशय ह्रीं ॐ स्वाहा।

मंत्र के जप संख्या का दशांश होम करना चाहिए। जिसमें हल्दी, चने की दाल, हरताल,  काले तिल एवं शुद्ध घी का प्रयोग जरूर करें।  समिधा में आम्र की सूखी लकड़ी या पीपल की लकड़ी का भी प्रयोग कर सकते हैं। मंत्र जाप उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख कर करना चाहिए। मन्त्र का जाप ध्यान के साथ मन ही मन अथवा धीरे धीरे उच्चारण के साथ करना चाहिए।

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