सूर्यग्रहण 9 मार्च 2016 क्या करना चाहिए

सूर्यग्रहण 9 मार्च 2016 क्या करना चाहिए (Solar Eclipse 9 March 2016 what should do ) फाल्गुण अमावस्या,दिन बुधवार खण्डग्रास तथा ग्रस्तोदय खण्डग्रास रूप में ही दिखाई देगा। मार्च  9 को लगने वाला खग्रास सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई देगा। यह भारत के केवल उत्तर-पश्चिमी तथा पश्चिमी (पश्चिमी राजस्थान तथा पश्चिमी गुजरात,पश्चिमी पंजाब,पश्चिमी महाराष्ट्र,) में दिखाई नहीं देगा।

सूर्यग्रहण 9 मार्च 2016

सूर्यग्रहण

सूर्यग्रहण 9 मार्च  2016 का पूर्ण विवरण

सूर्यग्रहण  9 मार्च 2016 (Solar Eclipse 9 March 2016 ) को भारत में दिखाई देनेवाला खग्रास सूर्यग्रहण का पूर्ण विवरण निम्न प्रकार से है:-

  • सूर्यग्रहण प्रारम्भ (स्पर्श)  –          4:49 
  • खग्रास प्रारम्भ –                           5:47
  • सूर्यग्रहण मध्य (परमग्रास)  –      7:27
  • खग्रास समाप्त   –                        9:08
  • सूर्यग्रहण(मोक्ष) समाप्त –          10:05

भारत देश के अतिरिक्त अन्य देश में दृश्य सूर्य ग्रहण ( Solar Eclipse in  other Country)

8/9 मार्च 2016 को सूर्य ग्रहण भारत के अलावा निम्न देशो में भी दिखाई देगा यथा — यह ग्रहण  दक्षिणी पूर्वी एशिया,  इण्डोनेशिया, थाइलैण्ड, दक्षीणी कोरिया, जापान ,सिंगापुर तथा आस्ट्रेलिया में दृश्य होगा। इन देशो के अतिरिक्त भी सुमार्ता बोरनियो, इण्डोनेशिया और उत्तर प्रशांत महासागर में सूर्यग्रहण दिखाई देगा।

ग्रहण का सूतक समय (Sutak Time of  Solar Eclipse 2016)

किसी भी ग्रहण का सूतक ग्रहण से ठीक १२ घंटे पूर्व आरम्भ हो जाती है।

सूतक प्रारम्भ समय – 8 मार्च  16 बजकर 49 मिनट से।

सूतक समाप्त होगा:  9 मार्च 10:05 बजे

जिन प्रांतो में सूर्यग्रहण दिखाई नहीं देगा वहा सूतक का विचार नहीं करना चाहिए।

सूर्यग्रहण का पर्वकाल

इस ग्रहण में भारत के लगभग उत्तर-मधय एवं दक्षिण भारत में यह ग्रहण ग्रस्तोदय है। इसलिए इसका पर्वकाल सूर्योदय से ही आरम्भ होगा। इसलिए सूर्योदय से पूर्व ही धार्मिक लोगो को जप पूजा दान में का कार्य शुरू कर देना चाहिए।  ग्रहण समाप्ति पर पुनः स्नान करके संकल्प पूर्वक दानादि कार्य करना चाहिए।

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ग्रहण के समय क्या करना चाहिए।

हजारों धार्मिक श्रद्धालुओं/आस्थावानों के द्वारा अक्सर यह प्रश्न पूछा जाता है कि ग्रहण के समय क्या करें, क्या न करें। इन प्रश्नों का उत्तर है ग्रहण के समय हमें शुभ कार्यों का सम्पादन करना चाहिए। यह शुभ कृत्य अत्यंत ही कल्याणकारी होता है। ग्रहण के सूतक तथा ग्रहण काल में हमें स्वयं के कल्याणकारी इच्छाओं के पूर्ति हेतू स्नान, ध्यान, दान, मन्त्र, स्तोत्र-पाठ, मंत्रसिद्धि, तीर्थस्नान, हवन-कीर्तन इत्यादि कार्यो का सम्पादन करना चाहिए। उपर्युक्त  कार्यो के करने से बाधाओं की निवृत्ति एवं सुख की प्राप्ति  होती है।

सूतक एवं ग्रहणकाल में क्या नहीं करना चाहिए

धार्मिक आस्थावान प्रवृत्ति के लोगो को अपने कल्याणार्थ सूतक एवं ग्रहणकाल में निम्न्लिखित कार्य नहीं करना चाहिए  या उससे बचना चाहिए। ग्रहण शुभ एवं अशुभ दोनों फल प्रदान  करता है। अतः  अब आपके ऊपर निर्भर करता है कि आपने किस फल के अनुरूप कार्य किया है।

ग्रहण काल में ध्यान देने योग्य मुख्य बातें

  • ग्रहण के समय भोजन नहीं करना चाहिए भोजन करने से अनेक प्रकार के व्याधियों से ग्रसित हो सकते है। यही कारण ग्रहणकाल में भोजन करना निषेध है  उस समय घर में रखा हुआ खाना या पेय पदार्थ पुनः उपयोग करने लायक नहीं होता है। हाँ ग्रहण या सूतक से पहले ही यदि सभी भोज्य पदार्थ यथा दूध दही चटनी आचार आदि में कुश रख देते है तो यह भोजन दूषित नहीं होता है और आप पुनः इसको उपयोग में ला सकते है।
  • सूतक एवं ग्रहण काल में झूठ, कपट, डिंग हाँकना आदि कुविचारों से परहेज करना चाहिए। ग्रहण काल में मन तथा बुद्धि पर पड़ने वाले कुप्रभाव से बचने के लिए जप, ध्यानादि का विधान है।
  • ग्रहण काल में व्यक्ति को मूर्ति स्पर्श, नाख़ून काटना, बाल काटना अथवा कटवाना, निद्रा मैथुन आदि कार्य नहीं करना चाहिए।
  • इस काल में स्त्री प्रसंग से नर-नारी दोनों को बचना चाहिए अन्यथा आँखो की बिमारी होने का गंभीर खतरा बना रहता है।
  • इस समय बच्चे, वृद्ध,गर्भवती महिला, एवं रोगी को यथानुकूल खाना अथवा दवा लेने में कोई दोष नहीं लगता है।
  • ग्रहण काल में शरीर, मन तथा बुद्धि में सामंजस्य बनाये रखना चाहिए
  • मन-माने आचरण करने से मानसिक तथा बौद्धिक विकार के साथ-साथ शारीरिक स्वास्थ्य का भी क्षय होता है। अतएव हमें अवशय ही ग्रहणकाल में मन,वचन तथा कर्म से सावधान रहना चाहिए।

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