एकादशी उपवास व्रत तिथि 2021 | Ekadashi Fast Vrat 2021

एकादशी उपवास व्रत तिथि 2018 | Ekadashi Fast Vrat 2018एकादशी उपवास व्रत तिथि 2021 | Ekadashi Fast Vrat 2021. विष्णु भक्त अपने मनोकामनाये पूर्ण करने हेतु प्रत्येक मास 11 वीं तिथि को एकादशी उपवास व्रत करते हैं। प्रत्येक महीना में दो एकादशी तिथि होती है जिसमे से एक शुक्ल पक्ष का और दूसरा कृष्ण पक्ष का होता है। एकादशी व्रत का सीधा सम्बन्ध भगवान् विष्णु से है कहा जाता है की उस दिन व्रत करने वाला विष्णु अवतार के रूप में इस भूलोक में स्थित होता है। विष्णु भगवान् अपने भक्तो को इच्छानुसार वर प्रदान करते है। प्राचीन काल से ही दान देना बहुत ही कल्याणकारी माना जाता है। दानवीर कर्ण का नाम आप सबने अवश्य ही सुना होगा। एकादशी तिथि को पवित्र माना गया है कोई भी भक्त यदि सभी एकादशी व्रत पुरे विधि-विधान से करता है तो उसकी मनोकामनाये बहुत जल्द ही पूरी होती है यही नहीं उसके मुँह से निकली वाणी सत्य साबित होती है।

एकादशी उपवास व्रत तिथि 2021

 09 जनवरीसफला एकादशीशनिवारकृष्ण पक्ष 
 24 जनवरीपौष पुत्रदा एकादशीरविवारशुक्ल पक्ष 
 07 फरवरीषटतिला एकादशीरविवारकृष्ण पक्ष 
23 फरवरीजया एकादशीमंगलवारशुक्ल पक्ष 
 09 मार्चविजया एकादशीमंगलवारकृष्ण पक्ष 
 25 मार्चआमलकी एकादशीगुरुवारशुक्ल पक्ष 
 07 अप्रैलपापमोचिनी एकादशीबुधवारकृष्ण पक्ष 
 23 अप्रैलकामदा एकादशीशुक्रवारशुक्ल पक्ष 
 07 मईवरुथिनी एकादशीशुक्रवारकृष्ण पक्ष 
 23 मईमोहिनी एकादशीरविवारशुक्ल पक्ष 
 06 जूनअपरा एकादशीरविवारकृष्ण पक्ष 
 21 जूननिर्जला एकादशीसोमवारशुक्ल पक्ष 
 05 जुलाईयोगिनी एकादशीसोमवारकृष्ण पक्ष 
 20 जुलाईदेवशयनी एकादशीमंगलवारशुक्ल पक्ष 
 04 अगस्तकामिका एकादशीबुधवारकृष्ण पक्ष 
 18 अगस्तश्रावण पुत्रदा एकादशीबुधवारशुक्ल पक्ष 
 03 सितंबरअजा एकादशीशुक्रवारकृष्ण पक्ष 
 17 सितंबरपरिवर्तिनी एकादशीशुक्रवारशुक्ल पक्ष 
 02 अक्टूबरइन्दिरा एकादशीशनिवारकृष्ण पक्ष 
 16 अक्टूबरपापांकुशा एकादशीशनिवारशुक्ल पक्ष 
 01 नवंबररमा एकादशीसोमवारकृष्ण पक्ष 
 14 नवंबरदेवुत्थान एकादशीरविवारशुक्ल पक्ष 
 30 नवंबरउत्पन्ना एकादशीमंगलवारकृष्ण पक्ष 
 14 दिसंबरमोक्षदा एकादशीमंगलवारशुक्ल पक्ष 
 30 दिसंबरसफला एकादशीगुरुवारकृष्ण पक्ष 

क्या है ? एकादशी व्रत विधि | Method of Ekadashi Vrat

जो जातक एकादशी व्रत करता है उसे एक दिन पूर्व ही अर्थात दशमी तिथि की रात्रि से ही व्रत के नियमों का अनुपालन करना चाहिए। वैसे जातक को दशमी के शाम में सूर्यास्त के बाद खाना नहीं खाना चाहिए और रात्रि में भगवान विष्णु का ध्यान करना चाहिए।

एकादशी व्रत के दिन प्रातः काल सूर्योदय से पहले उठकर नित्य क्रिया से निवृत्त होने के बाद सर्वप्रथम स्नान कर लेना चाहिए। नहाने के पानी में गंगाजल डालकर नहा लेना अच्छा माना जाता है।
नहाने के लिए कुश और तिल के लेप का प्रयोग करना अच्छा माना जाता है। स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनकर विधिवत भगवान श्री विष्णु जी की पूजा अर्चना करनी चाहिए।

भगवान् विष्णु की प्रतिमा के सामने दीप जलाकर व्रत का संकल्प लेने के उपरान्त कलश की स्थापना करना चाहिए। कलश को लाल वस्त्र से बांध कर उसकी पूजा करें। तत्पश्चात भगवान की प्रतिमा रखनी रखें, प्रतिमा को स्नानादि से शुद्ध करके नया वस्त्र पहना देना चाहिए । पुनः धूप, दीप से आरती करनी चाहिए और नैवेध तथा फलों का भोग लगाना चाहिए। उसके बाद प्रसाद का वितरण करना चाहिए। पुनः ब्राह्मणों को भोजन तथा दान-दक्षिणा देनी चाहिए। रात्रि में भगवान का भजन कीर्तन भी करना चाहिए। दूसरे दिन ब्राह्मण भोजन तथा सामर्थ्यानुसार दान करने के बाद भोजन करना चाहिए।

एकादशी व्रत शुद्ध मन से करना चाहिए। व्रत के दौरान व्रत के प्रति किसी प्रकार का शंका या पाप विचार नहीं लाना चाहिए। इस दिन झूठ नहीं बोलना चाहिए। व्रत करने वाले को पूरे दिन निराहार रहना चाहिए तथा शाम में संध्या पूजा के उपरान्त फल खाना चाहिए।

 

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