Lunar Eclipse 2021 – Rashifal of Chandra Grahan 26 May 2021

Lunar Eclipse 2021 – Rashifal of Chandra Grahan 26 May 2021. The effect of the lunar eclipse on 26 May 2021 will be visible in different forms on all zodiac signs. The zodiac, planet, constellation, day date, etc. have an interdependent relationship with each other. All have their influence on the natives of different zodiacs …

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Who should wear blue sapphire gemstone according to birth chart?

Who should wear blue sapphire gemstone according to the birth chart?. In astrology, the blue sapphire gemstone is related to the planet Saturn. People do many kinds of remedies to get rid of the effects of the inauspicious Saturn. In the same way, people wear gemstones for good results of auspicious planets. In this article, …

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Auspicious Date and Timing for Joining New job, Promotion & Transfer

Auspicious Date and Timing for Joining New job, Promotion & Transfer.  Auspicious times have been used for various purposes since ancient times. In Indian culture, sixteen rites from conception to death are also performed according to the auspicious time. The time fixed after almanac purification is called “auspicious time”. For this reason, it is generally …

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Yamitra Dosha in Marriage – विवाह मुहूर्त में यामित्र दोष और परिहार

Yamitra Dosha in Marriage – विवाह मुहूर्त में यामित्र दोष और परिहार  विवाह मुहूर्त में यामित्र दोष का परिहार अवश्य ही कर लेना चाहिए ऐसा नहीं करने पर विवाह उपरान्त दाम्पत्य जीवन में कष्ट मिलने की संभावना होती है। शास्त्रानुसार विवाह नक्षत्र से 14 वें नक्षत्र पर जब कोई ग्रह हो, तो यामित्र या जामित्र …

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Vedh Dosha in Marriage – विवाह में पंचशलाका और सप्तशलाका वेध दोष

Vedh Dosha in Marriage – विवाह में पंचशलाका और सप्तशलाका वेध दोष. विवाह में शुभ मुहूर्त निर्धारण के लिए अनेक प्रकार के दोषों का परिहार किया जाता है। पंचशलाका व सप्तशलाका चक्र वेध दोष को सभी जगह वर्जित माना गया है। ज्योतिष सिद्धांत के अनुसार यदि विवाह मुहूर्त वाले दिन वेध दोष है तो उस …

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Chandra or Tara Bal – शुभ मुहूर्त निर्धारण में चंद्र और तारा बल का महत्त्व

Chandra or Tara Bal – शुभ मुहूर्त निर्धारण में चंद्र और तारा बल का महत्त्व. शुभ मुहूर्त का निर्धारण बिना चन्द्र और तारा बल के शुद्धि से नहीं हो सकता है इसलिए चंद्र और तारा शुद्धि अत्यंत ही आवश्यक विषय है। अतः किसी भी कार्य को शुरू करने से पूर्व तारा और चंद्र बल अवश्य …

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चलित कुंडली या दशम भाव मध्य स्पष्ट का निर्माण कैसे होता है?

चलित कुंडली या दशम भाव मध्य स्पष्ट का निर्माण कैसे होता है? जन्मकुंडली का निर्माण जिस विधि से किया जाता है सामान्यतः उसी विधि से सर्वप्रथम दशम भाव स्पष्ट निकाला जाता है उसके बाद लग्न के भोगांश और दशम भाव के भोगांश के आधार पर भाव मध्य निकाला जाता है। सबसे पहले एफिमेरीज़ की सहायता …

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